Holy Scriptures

Wednesday, 20 May 2020

मानव उत्थान



यूवा शक्ति देश और समाज की रीढ़ होती है. युवा देश और समाज को नए शिखर पर ले जाते हैं. युवा देश का वर्तमान हैं, तो भूतकाल और भविष्य के सेतु भी हैं. युवा देश और समाज के जीवन मूल्यों के प्रतीक हैं.  युवा गहन ऊर्जा और उच्च महत्वकांक्षाओं से भरे हुए होते हैं. उनकी आंखों में भविष्य के इंद्रधनुषी स्वप्न होते हैं. समाज को बेहतर बनाने और राष्ट्र के निर्माण में सर्वाधिक योगदान युवाओं का ही होता है. देश के स्वतंत्रता आंदोलन में युवाओं ने अपनी शक्ति का परिचय दिया था.
भारत एक विकासशील और बड़ी जनसंख्या वाला देश है. यहां आधी जनसंख्या युवाओं की है. देश की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है. संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है. यहां के लगभग 60 करोड़ लोग 25 से 30 वर्ष के हैं. यह स्थिति वर्ष 2045 तक बनी रहेगी. विश्व की लगभग आधी जनसंख्या 25 वर्ष से कम आयु की है. अपनी बड़ी युवा जनसंख्या के साथ भारत अर्थव्यवस्था नई ऊंचाई पर जा सकता है. परंतु इस ओर भी ध्यान देना होगा कि आज देश की बड़ी जनसंख्या बेरोजगारी से जूझ रही है. भारतीय संख्यिकी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ रही है. देश में बेरोजगारों की संख्‍या 11.3 करोड़ से अधिक है. 15 से 60 वर्ष आयु के 74.8 करोड़ लोग बेरोजगार हैं, जो काम करने वाले लोगों की संख्‍या का  15 प्रतिशत है. जनगणना में बेरोजगारों को श्रेणीबद्ध करके गृहणियों, छात्रों और अन्‍य में शामिल किया गया है. यह अब तक बेरोजगारों की सबसे बड़ी संख्‍या है. वर्ष 2001 की जनगणना में जहां 23 प्रतिशत लोग बेरोजगार थे, वहीं 2011 की जनगणना में इनकी संख्‍या बढ़कर 28 प्रतिशत हो गई. बेरोजगार युवा हताश हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में युवा शक्ति का अनुचित उपयोग किया जा सकता है. हताश युवा अपराध के मार्ग पर चल पड़ते हैं. वे नशाख़ोरी के शिकार हो जाते हैं और फिर अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए अपराध भी कर बैठते हैं. इस तरह वे अपना जीवन नष्ट कर लेते हैं. देश में हो रही 70 प्रतिशत आपराधिक गतिविधियों में युवाओं की संलिप्तता रहती है. ऐसे में संत रामपाल जी महाराज जीने बहुत ही अच्छा कदम उठाया है नशाखोरी जमाखोरी कोई भी नशीली वस्तु का सेवन करता हो व्यक्ति उसको सिर्फ नाम दीक्षा प्राप्त करने से ही नशा छोड़ देता है व्यक्ति अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना चैनल पर शाम 7:30 से लेकर 8:30 तक जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के मंगल अमृत प्रवचन
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Thursday, 14 May 2020

Bad level of education




भारत देश प्राचीन काल से ही अपनी विद्वता के लिए विश्वविख्यात रहा है। इस भूमि ने याज्ञवलक्य और गार्गी जैसे प्रकाण्ड शास्त्रार्थियों को जन्म दिया वहीं ये महात्मा बुद्ध, चाणक्य और स्वामी विवेकानन्द जैसे विद्वानों कि जननी भी रही। एक ओर जहाँ हमारे वेदों ने दुनिया को विज्ञान,तकनीकी और अनुसन्धान सिखाया वहीं दूसरी ओर हम सांस्कृतिक रूप से भी काफी समृद्ध रहे। यही वजह थी कि हमें “विश्वगुरु” का दर्जा मिला।
शिक्षा का हमारे जीवन में बहुत महत्व है, शिक्षा जितनी आत्मनिर्भरता तथा कैरियर के लिए जरुरी है उतनी ही व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आवशयक है । अच्छी शिक्षा प्राप्त करने वाला व्यक्ति एक अच्छे स्वस्थ समाज का निर्माण करने में सहायक है । प्रायः देखा जाता है जिस राष्ट्र में जितनी साक्षरता होती है वहाँ विकास द्रुतगति से होता है । शिक्षा हमे अच्छा नागरिक बनाने के साथ - साथ एक सफल व्यक्ति भी बनाती है, शिक्षा में गुरु की महवत्पूर्ण भूमिका होती है, माता - पिता के बाद यदि बच्चे किसी पे विश्वास कर सकते है तो वह है गुरु । गुरु एक बालक को उसके अंदर विद्यमान गुणों को निखारकर उँच्चाईयो तक ले जाता है ।
आजकल गुरु शिष्य परंपरा समाप्त हो गई है तथा शिक्षा का व्यवसायी करण होने से इसके स्तर में गिरावट आ गई है । आजकल शिक्षा का मतलब है पैसा दो और शिक्षा ग्रहण करें, बालक का विकास हो रहा है या नहीं, उसका रुझान किस ओर है, उसमे कितनी योग्यता है इस बात से स्कूलों का कोई सरोकार नहीं होता, वहाँ तो सिर्फ अपनी कर्त्तव्य पूर्ति की जाती है ।

इसका प्रमुख कारण है स्कूलों का निजीकरण, स्कूल अपने लाभ के लिए अधिक सोचते है, आजकल बच्चों पर पढ़ाई का भर बढ़ता जा रहा है ओर शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है, आज जगह - जगह बच्चों को टूशन पढ़ाने के लिए संस्थान खुलते जा रहे है ।
शिक्षा हमे अच्छे संस्कार देती है, नैतिकता देती है, समाज में मिल जुलकर रहना सिखाती है, आज जरुरत है ऐसे संस्थानों की जहाँ बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार उन्ही विषयों के बारे में  पढ़ाया जाए जहाँ वह आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सके तथा उन्हें आर्थिक समस्याओं से न जूझना पड़े ।


आज हमारे देश का शिक्षा स्तर  इतना गिर गया है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए बहुत से शिक्षकों की कमी है जिसके चलते हुए हमारे सरकारी स्कूल के छात्र छात्रा पढ़ाई में बहुत ही कमजोर हैं

जिसके चलते सरकारी स्कूलों में बच्चों की कमी होती जा रही है और प्राइवेट स्कूल है बढ़ते जा रहे हैं!


Wednesday, 13 May 2020

Who is the true god

सच्चा भगवान यानी पूर्ण परमात्मा वही है जिसकी शरण में जाने से हमें इस लोक में सुख मिले व मोक्ष की प्राप्ति हो

श्रीमद भगवत गीता अध्याय 18 श्लोक 66 में श्री कृष्ण अर्जुन को परमात्मा की शरण में जानेको कह रहे हैं पूर्ण परमात्मा की शरण में जाने से ही सुख व मोक्ष की प्राप्ति होती हैं वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब की ह
परमात्मा साकार है
वेद प्रमाणित करते हैं कबीर साहिब भगवान हैं पूर्ण परमात्मा कबीर देव कबीर परमेश्वर तीसरे मुक्तिधाम अर्थात सतलोक में रहता है ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 में प्रमाण है

यजुर्वेद अध्याय 4 मंत्र 15 में प्रमाण मिलता है कि परमात्मा साकार है  शरीर है

पवित्र बाइबल में भी परमात्मा सरकार का प्रमाण है पृष्ठ नंबर 2 पर 26 व 27 मैं प्रमाण है कि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार बनाया इससे परमेश्वर साकार सिद्ध होता है

कुरान शरीफ में प्रमाण है कुरान शरीफ सूरत फुरकान 25 आयत 59 में प्रमाण है कि कबीर अल्लाह ने 6 दिन में सृष्टि रची और  7 वे दिन तक सिहासन पर जा विराजा इससे सिद्ध हुआ परमात्मा साकार है
पूर्ण परमात्मा की पहचान-
वेदों के अनुसार -
वेदों में बताया गया है कि वह कान्तिमय परमात्मा 3 प्रकार के शरीर धारण करता है।
वह सौम्य स्वभाव परमात्मा अपने निज लोक में विराजमान हैं जिसमें उनके एक रोम कूप का प्रकाश करोड़ों सूरज के समान है। 
2 वह सौम्य पुरुष सशरीर धरती पर आते हैं और नवजात शिशु का रूप धारण कर लीला करते हैं।बालपन में उनकी परवरिश कुंआरी गायों से होती है।
 3 वह पुरुष किसी भी स्थान पर प्रकट होकर अपने दृढ़ भक्तों को मिलते हैं।
प्रमाण सहित सिद्ध होता है कि सच्चा भगवान कबीर परमेश्वर जी हैं

Friday, 8 May 2020

Drug Free India

तंबाकू से हानि

संत गरीबदास जी ने कहा है कि तमा+खू = तमाखू
खू नाम खून का तमा गाय सौ बार सौगंध इसे न पीयें खाय
फारसी भाषा में तमा गाय को कहते हैं खू= खून यानी रकत को कहते हैं यह तमाखू गाय के रकत से उपजा है इसके ऊपर गाय के बाल जैसे रोम जैसे होते हैं हे मानव तेरे को सौ बार सौगंध है कि इस तंबाखू का सेवन किसी रूप में भी मत कर
संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेने से ही जो पहले नशा करते थे व्यक्ति वह नशा छोड़ देते हैं कितना ही नशा करते हो चाहे जैसे शराब गांजा अफीम हीरोइन कोई भी नशा संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेने मात्र से ही छूट जाता है अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना चैनल पर शाम 7:30 से लेकर 8:30 तक

Wednesday, 6 May 2020

मनुष्य V/s नशा

◆ मनुष्य >

                  क्या आपको पता है कि 84 लाख योनियों में से सबसेे श्रेष्ठ योनि मनुष्य की है और परमात्मा ने मनुष्य का शरीर बहुत ही अद्भुत बनाया है मनुष्य में बहुत सी अद्भुुत शक्ति व कला होती है और मनुष्य का दिमाग सोचने समझने में सबसे आगेे होता परंतु नशा मनुष्य को राक्षस बना देता है नशे की लत बहुुत बुरी जैसे कोई भी नशाा हो जेसी 1. बीड़ी पीना 2. सिगरेट पीना 3. जर्दा खाना 4. गुटखा खाना 5. शराब पीना 6. अफीम गांजा मांस का सेवन करना इत्यादि सभी मनुष्य के हानिकारक होते हैं
परमात्मा ने मनुष्य को यह चीज खाने को नहीं दी थी परंतु मनुष्य शराब पीकर अपनी मानसिक शक्ति खो बैठता है और साथ में घर को उजाड़ देता है नशा ऐसे में संत रामपाल जी महाराज जी ने नशा मुक्त भारत को बनाने में एक बेड़ा उठाया है जो संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा ले लेता है कितना भी खतरनाक नशा करने वाला मनुष्य हो उन सभी का नशा छूट जाता है
अवश्य पढ़ें अनमोल पुस्तक जीने की राह है व ज्ञान गंगा को पुस्तक निशुल्क मंगवाने के लिए हमारे इन नंबरों 74968-01825 पर मैसेज करें और निशुल्क पुस्तक ज्ञान गंगा व जीने की राह
अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना चैनल पर शाम 7:30 से लेकर 8:30 तक

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